Sunday, 27 July 2008

टार्गेट मुंबई

इंडियन मुजाहिदीन ने अब अपना निशाना मुंबई को बनाने की धमकी दी है।देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पहले भी आतंकवादियों का निशाना बन चुकी है। पिछले 15 साल में मुंबई के लगभग सभी प्रमुख इलाकों में बम धमाके हो चुके हों। चाहे लोकल ट्रेनें हो, बेस्ट की बसें हों, बाजार हों या फिर टूरिस्ट सेंटर हो आतंकवादियों ने हर जगह पर खूनी साजिशों को अंजाम दे चुके हैं।

12 मार्च 1993 को आतंकवादियों ने मुंबई में सिलसिलेवार धमाके किये थे, जिनमें 257 लोग मारे गये, जबकि करीब 700 लोग घायल हुए थे। उस हमले के बाद भी मुंबई को आतंकवादियों ने 7 बार अपना निशाना बनाया।

2 दिसंबर 2002- घाटकोपर रेल स्टेशन के बाहर एक बेस्ट की बस में विस्फोट होता है। इस धमाके में 2 लोग मारे गये जबकि दर्जभर लोग घायल हुए। धमाकों के लिये प्रतिबंधित संगठन सिमी को जिम्मेदार माना गया। कुछ महीने पहले ही केंद्र सरकार ने सिमी पर बैन का ऐलान किया था।

6 दिसंबर 2002- घाटकोपर बस धमाके के 4 दिन बाद ही मुंबई सेंट्रल रेल स्टेशन पर मैक डॉनाल्ड रेस्तरां में जोरदार धमाका होता है। एयरकंडिश्नर डक्ट में छुपाये गये इस बम के विस्फोट से 25 लोग घायल हुए। इस हमले के पीछे भी सिमी का हाथ माना गया।

27 जनवरी 2003- विलेपार्ले रेस स्टेशन के बाहर सब्जी बाजार में साईकिल पर रखे एक बम में धमाका होता है। 30 लोग घायल होते हैं, जबकि 1 की मौत होती है। इस धमाके में भी मुंबई पुलिस सिमी के सदस्यों को गिरफ्तार करती है।

13 मार्च 2003- मुलुंद रेल्वे स्टेशन पर पहुंच रही एक लोकल ट्रेन के एक डिब्बे में जोरदार विस्फोट हुआ जिसमें 11 लोग मारे गये और 65 लोग घायल हुए। ये धमाका भीड के वक्त हुआ था, जब लोग कामकाज की जगह से अपने घर लौट रहे थे।

28 जुलाई 2003- मुंबई के घाटकोपर इलाके में बेस्ट की बस में फिर एक बार धमाका हुआ। इस हमले में 3 लोग मारे गये, जबकि आधा दर्जन लोग घायल हुए।

25 अगस्त 2003- दोपहर के वक्त दक्षिण मुंबई के जवेरी बाजार और गेटवे औफ इंडिया पर जबरदस्त धमाके हुए। इन धमाकों में 60 लोग मारे गये जबकि 200 लोग घायल हुए। धमाकों के लिये लश्कर ए तैयबा को जिम्मेंदार

11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए धमाकों को इस दशक में हुए देश के सबसे बडे आतंकवादी हमलों में से एक माना जा रहा है। आतंकी संगठन लश्कर ए कहर ने खार, बांद्रा, माहिम, माटुंगा, जोगेश्वरी, बोरिवली और मीरा रोड में लोकल ट्रेनों के पहले दर्जे के डिब्बों में धमाके किये जिनमें 187 लोग मारे गये और 700 के करीब लोग घायल हुए। हर धमाके के बाद मुंबई पुलिस ने जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी का दावा किया, लेकिन पुलिस को शक है शहर में आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल भी मौजूद हैं, जो हरकत में आने के लिये अपने आकाओं के आदेश का इंतजार करते हैं।

वक्त के साथ साथ आतंकवादियों ने अपने काम करने का तरीका भी बदला है। अब वे समझ चुके हैं कि किसी भी आतंकी हमने के बाद जांच एजेंसियां कैसे रिएक्ट करतीं हैं। आतंकवादी अब इन्ही बातों का ध्यान रख अपनी साजिशों को अंजाम देते हैं।

Saturday, 12 July 2008

डी कंपनी का नया पैंतरा - रिश्तों की रणनीति

डॉन के घर फिर बजी शहनाई। फिर हुआ जश्न। फिर जुटे अपने...लेकिन गुपचुप।
अंडरवर्लड डॉन दाऊद इब्राहिम ने अपने मरहूम भाई साबिर के बेटे रज्जाक उर्फ जाकिफ की शादी पिछले महीने कराची में एक आईएसआई अफसर की बेटी से करवाई। दाऊद रज्जाक को अपना बेटा मानता है। रज्जाक के पिता साबिर की 80 के दशक में दुश्मन पठान गैंग ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। चूंकि दाऊद अमेरिका और भारत की खुफिया एजेंसियों के निशाने पर है इसलिये ये सब हुआ बिलकुल गुपचुप.

२६ जून २००८ को रज्जाक की शादी एक आईएसआई अफसर की बेटी नसरीन से हुई। ये एरेंजड मैरेज थी। रिश्ता खुद दाऊद ने ही तय किया था। निकाह के मौके पर छोटा शकील और फहीम जैसे गिरोह के कुछ खास गुर्गों के अलावा दाऊद का भाई अनीस, हुमांयू, मुस्तकीम और नूरा मौजूद थे।मुंबई में रह रही दाऊद की बहन हसीना और भाई इकबाल कासकर ही 2 ऐसे करीबी रिश्तेदार थे, जो इस मौके पर गैरहाजिर थे। लडकी वालों की ओर से भी सगे संबंधियों के अलावा कुछ चुनिंदा आईएसआई अफसरों को ही बुलाया गया।

फरवरी 1980 में मुंबई के प्रभादेवी इलाके में साबिर की पठान गैंग ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। साबिर की हत्या के बाद उसकी पत्नी शहनाज ने दूसरी शादी कर ली, लेकिन साबिर का बेटा रज्जाक दाऊद के साथ दुबई चला गया और 2001 में दुबई से कराची। बिना बाप के रज्जाक की परवरिश दाऊद ने खुद की। दाऊद उसे अपना बडा बेटा मानता है।दाऊद ने ही अपने इस भतीजे री परवरिश की, उसकी जरूरतें पूरी कीं, उसकी पढाई-लिखाई करवाई।

दाऊद की ये दिली चाहत थी कि वो अपने इस भतीजे की शादी पूरी शान-ओ-शौकत से करे।23 जुलाई 2005 में अपनी बेटी महारूख की शादी के वक्त दाऊद ने कोई कसर नहीं छोडी थी। दुबई और कराची के पांच सितारा होटलों में दावते आम रखी गई थी। मेहमानों के ठहरने के लिये महंगे कमरे बुक कराये गये थे, लेकिन इस बार वैसा कुछ नहीं था। चूंकि पाकिस्तान दुनिया के सामने यही कहता है कि दाऊद उसकी जमीन पर नहीं है इसलिये शादी गुपचुप तरीके से बिना किसी धूमधडाके के हुई जिसमें सिर्फ परिवार के सदस्य और गैंग के खास लोग ही शरीक हुए। अब धीरे धीरे करके मुंबई के नाते रिश्तेदारों और गिरोह के सदस्यों को दावत के लिये पाकिस्तान बुलाया जा रहा है।हालांकि शादी की खबर डी कंपनी ने छुपाने की बहुत कोशिश की, लेकिन खुफिया एजेंसियों को भनक लग ही गई और अब ये पता किया जा रहा है कि कौन कौन लोग दाऊद की दावत खाने कराची जा रहे हैं।

अपने नाते रिश्तेदारों की शादी में भी दाऊद की एक रणनीति छुपी है। उसने अपनी बेटी की शादी जावेद मियांदाद के बेटे से करवाई। भतीजे की शादी आईएसआई अफसर से। पाकिस्तान के बडे लोगों से इन पारिवरिक रिश्तों के जरिये दाऊद पाकिस्तान में अपनी सलामती की गारंटी ले रहा है। दाऊद के एक बेटा अभी और भी हैं। ये जानना दिलचस्प होगा कि उसकी शादी किससे होती है।

Friday, 11 July 2008

डी कंपनी का नया पैंतरा - रिश्तों की रणनीति

डॉन के घर फिर बजी शहनाई। फिर हुआ जश्न। फिर जुटे अपने...लेकिन गुपचुप।अंडरवर्लड डॉन दाऊद इब्राहिम ने अपने मरहूम भाई साबिर के बेटे रज्जाक उर्फ जाकिफ की शादी पिछले महीने कराची में एक आईएसआई अफसर की बेटी से करवाई। दाऊद रज्जाक को अपना बेटा मानता है। रज्जाक के पिता साबिर की 80 के दशक में दुश्मन पठान गैंग ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। चूंकि दाऊद अमेरिका और भारत की खुफिया एजेंसियों के निशाने पर है इसलिये ये सब हुआ बिलकुल गुपचुप.२६ जून २००८ को रज्जाक की शादी एक आईएसआई अफसर की बेटी नसरीन से हुई। ये एरेंजड मैरेज थी। रिश्ता खुद दाऊद ने ही तय किया था। निकाह के मौके पर छोटा शकील और फहीम जैसे गिरोह के कुछ खास गुर्गों के अलावा दाऊद का भाई अनीस, हुमांयू, मुस्तकीम और नूरा मौजूद थे।मुंबई में रह रही दाऊद की बहन हसीना और भाई इकबाल कासकर ही 2 ऐसे करीबी रिश्तेदार थे, जो इस मौके पर गैरहाजिर थे। लडकी वालों की ओर से भी सगे संबंधियों के अलावा कुछ चुनिंदा आईएसआई अफसरों को ही बुलाया गया।फरवरी 1980 में मुंबई के प्रभादेवी इलाके में साबिर की पठान गैंग ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। साबिर की हत्या के बाद उसकी पत्नी शहनाज ने दूसरी शादी कर ली, लेकिन साबिर का बेटा रज्जाक दाऊद के साथ दुबई चला गया और 2001 में दुबई से कराची। बिना बाप के रज्जाक की परवरिश दाऊद ने खुद की। दाऊद उसे अपना बडा बेटा मानता है।दाऊद ने ही अपने इस भतीजे री परवरिश की, उसकी जरूरतें पूरी कीं, उसकी पढाई-लिखाई करवाई।दाऊद की ये दिली चाहत थी कि वो अपने इस भतीजे की शादी पूरी शान-ओ-शौकत से करे।23 जुलाई 2005 में अपनी बेटी महारूख की शादी के वक्त दाऊद ने कोई कसर नहीं छोडी थी। दुबई और कराची के पांच सितारा होटलों में दावते आम रखी गई थी। मेहमानों के ठहरने के लिये महंगे कमरे बुक कराये गये थे, लेकिन इस बार वैसा कुछ नहीं था। चूंकि पाकिस्तान दुनिया के सामने यही कहता है कि दाऊद उसकी जमीन पर नहीं है इसलिये शादी गुपचुप तरीके से बिना किसी धूमधडाके के हुई जिसमें सिर्फ परिवार के सदस्य और गैंग के खास लोग ही शरीक हुए। अब धीरे धीरे करके मुंबई के नाते रिश्तेदारों और गिरोह के सदस्यों को दावत के लिये पाकिस्तान बुलाया जा रहा है।हालांकि शादी की खबर डी कंपनी ने छुपाने की बहुत कोशिश की, लेकिन खुफिया एजेंसियों को भनक लग ही गई और अब ये पता किया जा रहा है कि कौन कौन लोग दाऊद की दावत खाने कराची जा रहे हैं।अपने नाते रिश्तेदारों की शादी में भी दाऊद की एक रणनीति छुपी है। उसने अपनी बेटी की शादी जावेद मियांदाद के बेटे से करवाई। भतीजे की शादी आईएसआई अफसर से। पाकिस्तान के बडे लोगों से इन पारिवरिक रिश्तों के जरिये दाऊद पाकिस्तान में अपनी सलामती की गारंटी ले रहा है। दाऊद के एक बेटा अभी और भी हैं। ये जानना दिलचस्प होगा कि उसकी शादी किससे होती है।

#Bombayphile - Company of Woman : David Headley's Secret Girlfriend

Have you watched Ram Gopal Verma's 1998 movie Satya? Urmila Matondar plays the role of Singer Vidya, who is jolted when she learns that ...