Tuesday, 7 August 2007

बांग्लादेश से घुस्पैठ का सच - जीतेंद्र दीक्षित

इस्माइल 1995 में भारत में घुस्पैठ करके आया और तबसे हरसाल वो बांग्लादेश बडी आसानी से आता जाता रहता है। उसका कहना है कि सीमा पर बसे दलाल दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों की मिलीभगत से हर साल हजारों लोगों की घुस्पैठ कराते हैं। हमसे बातचीत में इस्माइल ने ये बातें बताईं-

- सीमा से सटे गांवों में दलालों का डेरा।
इस्माइल के मुताबिक भारत और बांग्लादेश में सीमा से सटे गांव वाले दलालों का काम करते हैं। लोगों को 50 से 100 के जत्थों में बॉर्डर क्रॉस कराया जाता है। दलालों की भूमिका भी आपस में बंटी होती है। एक दलाल बॉर्डर क्रास करने के इच्छुक लोगों को सीमा तक लाता है। दूसरा दलाल उन्हें अपने साथ बॉर्डर क्रॉस करवाता है, तीसरा दलाल बॉर्डर क्रॉस कर लेने के बाद देश के अंदरूनी हिस्से की ओर निकलने में मदद करता है।

- सुरक्षा बलों से मिलीभगत।
इंटरव्यू में इस्माइल मे बताया कि दोनों देशों के सुरक्षा बलों की दलालों के साथ मिलीभगत है। दलाल प्रति व्यकित बॉर्डर क्रास कराने के लिये 2500 रूपये लेते हैं लेकिन सुरक्षाकर्मियों को ये प्रति व्यकित 50 से 100 रूपये देते हैं। मतलब कि 50 या 100 रूपये में होता है देश की सुरक्षा से खिलवाड।

कौन हैं घुस्पैठियों के दलाल।
इस्माइल के मुताबिक बांग्लादेश से भारत में घुस्पैठ का काम खास तौर पर अब्दुल्ला, कासम और बच्चू नाम के दलाल देखते हैं। दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच इनके हितैषी मौजूद हैं। घुस्पैठ का सारा नेटवर्क ये दलाल ही कंट्रोल करते हैं।

- कैसे क्रास कराते हैं बॉर्डर।
बार्डर अक्सर रात के वक्त क्रास कराया जाता है। सुरक्षा बलों के साथ अपने रिश्तों के चलते दलालों को पता चल जाता है कि कब किस इलाके में गश्त होगी या नहीं होगी। उसी मुताबिक बॉर्डर क्रास कराने का वक्त और जगह तय होती है।कई बार किन्ही कारणों से अगर सीमा पर सुरक्षा चुस्त की जाती है तो घस्पैठियों को 2-3 दिन तक ठहरने के लिये कहा जाता है। इनके रूकने का इंतजाम सीमा से सटे गांवो में हो जाता है।घुस्पैठियों को अपना सामान लेकर तेजी से एक ओर से दूसरी ओर भागने के लिये कहा जाता है।

डीपोर्ट का नाटक।
हर साल भारत भर से हजारों बांग्लादेशी वापस डीपोर्ट किये जाते हैं। ज्यादातर लोग निम्न वर्ग के होते हैं जो गरीबी के चलते रोजगार की तलाश में भारत में घुसते है...लेकिन डीपोर्ट किये जाने वाले तमाम लोग ज्यादा से ज्यादा 2 से 3 महीने में दलालों की मदद से वापस भारत पहुच जाते हैं।

इस्माइल की अपनी कहानी।
इंटर्व्यू में इस्माइल ने खुद अपनी कहानी भी बताई है कि किस तरह से वो गरीबी के चलते 1995 में बांग्लादेश से घुस्पैठ करके भारत आया।अब वो मुंबई में कपडों का छोटा मोटा कारोबार कर रहा है और मुंबई पुलिस के लिय खबरी का भी काम करता है। जबसे ये खुलासा हुआ है कि मुंबई में ट्रेन धमाकों के लिये इस्तेमाल किया गया आरडीएक्स बांग्लादेश के रास्ते से आय़ा है, पुलिस के लिये इस्माइल का काम बठ गया है।

इस घुस्पैठिये के इंटरव्यू पर हमने मुंबई में बांग्लदेशी घुसपैठियों के मसले पर काम करने वाले आईजी सत्यपाल सिंह से बात की। सिंह ने ये बाते बताईं-

- पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई एस आई अब भारत में आतंकी साजिशों को अंजाम देने के लिये बांग्लादेश का इस्तेमाल कर रही है। 11 जुलाई 2006 को मुंबई की 7 ट्रेनों में हुए धमाकों के लिये पाकिस्तानी आरडीएक्स के साथ नेपास के रास्ते से ही भारत आये थे। बांग्लादेश में न केवल आतंकियों ने ट्रेनिंग कैंप बना लिये हैं, बल्कि वहां से हथियारों, बारूद और नार्कोटिक्स की स्मगलिंग भी होती है।
- बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में बांग्लादेशी घुस्पैठिये बडे पैमाने पर बस गये हैं। इनका प्रभाव दिनोंदिन इस कदर बढ रहा है कि चंद सालों बाद ये वहां के जनप्रतिनिधि भा तय करेगे।
- दुर्भाग्य से बांग्लादेशी सीमा के पास हमारा सीमा कवच कमजोर है। ये बात सही है कि सीमा से सटे गांव बांग्लदेसियों के प्रभाव में हैं और इस हालत के पीछे भ्रष्टाचार एक बडा कारण है।

No comments:

#Bombayphile - Company of Woman : David Headley's Secret Girlfriend

Have you watched Ram Gopal Verma's 1998 movie Satya? Urmila Matondar plays the role of Singer Vidya, who is jolted when she learns that ...