अंडरवर्लड डॉन अश्विन नाईक भी बनना चाहता है राजेनता और इसलिये जेल से छूटने के बाद वो लगा रहा है राजनेताओं के घरों के चक्कर। इसी सिलसिले में आज उसने शिवसेना का कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मुलाकात की।
अश्विन नाईक अपनी पत्नी की हत्या समेत तमाम आपराधिक मामलों में जेल में कैद था और चंद महीनों पहले ही उसकी रिहाई हुई।
अंडरवर्लड डॉन अश्विन नाईक वैसे तो व्हील चैयर के बिना हिल भी नहीं सकता, लेकिन उसके मंसूबे राजनीति में हडकंप मचाने के हैं। नाईक चाहता है कि वो भी महाराष्ट्र की राजनीति में जोर आजमाईश करे और इसी सिलसिले में उसने मुलाकात की शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से। शिवसेना से वैसे अश्विन नाईक की करीबी नई नहीं है। नाईक की मृत पत्नी नीता नाईक शिवसेना की नगरसेविका यानी कि पार्षद रह चुकीं हैं। पिछले हफ्ते ही खबर आई थी कि नाईक ने एमएनएस नेता राज ठाकरे से मुलाकात की है, लेकिन दोनो लोग इस बारे में खुलकर कुछ नहीं रहे।
अश्निन नाईक राजनेताओं के चक्कर क्यों लगा रहा है ? सूत्रों की मानी तो नाईक अब अपने पुराने प्रतिद्वंदवी अंडरवर्लड डॉन अरूण गवली के पैटर्न पर अपना करियर बनाना चाहता है। गवली ने अंडरवर्लड से राजनीति में कदम रखा और विधायक बन गया। उसने अपनी बेटी और भाभी को भी नगरसेविका बनवा दिया। गवली को देखकर अश्विन नाईक को भी लगता है कि राजनीति में आने के बाद वो फिरसे ताकतवर हो सकेगा और सुरक्षित भी रहेगा।
व्हील चेयर के सहारे अपनी जिंदगी बिता रहे अश्विन नाईक को लाचार न समझिए। मुंबई अंडरवर्लड में इसकी इमेज के बहुत ही क्रूर और खतरनाक डॉन की रही है। मुंबई में दाऊद इब्राहिम के गिरोह के बाद जो 3 दूसरे बडे गिरोह हैं उनमें से एक है अश्विन नाईक का गिरोह। इस गिरोह की कमान पहले अश्विन के बडे भाई अमर नाईक के हाथ में थी। अश्विन नाईक वैसे तो पेशे से इंजीनियर था, लेकिन 1997 में शहीद इंस्पेक्टर विजय सालस्कर के हाथों अमर नाईक एक एनकाउंटर में मारा गया. जिसके बाद गिरोह की कमान अश्विन नाईक के हाथ आ गई। अश्विन पर जेल में रहकर भी अपना गिरोह चलाने का आरोप था। 13 नंवबर 2000 को अश्विन नाईक की पत्नी नीता नाईक की उसके घर में हत्या कर दी गई। पुलिस का कहना था कि हत्या की सुपारी अश्विन नाईक ने ही जेल में रहकर दी थी क्योंकि उसे शक था कि पत्नी नीता के एक पुलिस कांस्टेबल के साथ अनैतिक रिश्ते हैं..पर पुलिस अदालत में नीता की हत्या समेत अश्विन पर लगे तमाम आरोपो को साबित नहीं कर पाई और इसी साल वो तमाम मामलों से बरी हो गया।
जेल से छूटने के बाद अब अश्निन नाईक राजनीति में कदम जमाने की कोशिश तो कर रहा है, लेकिन ये जानना दिलचस्प होगा कि कौनसी राजनीतिक पार्टी अश्विन को जगह देती है। ताजा चुनावी नतीजों ने बाहुबलि उम्मीदवारों को धूल चटा दी और ये बात राजनीतिक दल अच्छी तरह से जानते हैं।
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