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Tuesday, 28 September 2010

सरकार का लाडला जेलर

मुंबई की आर्थर रोड जेल में हुए गैंगवार ने फिर एक बार जेल प्रशासन पर सवाल उठा दिये हैं। इन सवालों के घेरे में हैं जेल सुपिरिंटेंडेंट राजेंद्र धामणे। धामणे के कार्यकाल में गैंगवार की ये दूसरी घटना है, लेकिन अपने राजनैतिक रिश्तों के चलते वे हर बार कार्रवाई से बच जाते हैं। मुंबई आने से पहले धामणे का पुणे के यरवदा जेल और ठाणे में कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है।
मुंबई के आर्थर रोड जेल में फिरसे हुआ गैंगवार और फिरसे बेपर्दा हो गया यहां का जेल प्रशासन। डॉन अबू सलेम के गुर्गे मेंहदी हसन पर जिस तरह से पांडव पुत्र गैंग के सदस्यों ने हमला किया उससे यही बात सामने आती है कि न तो कैदियों में जेल प्रशासन का कोई डर है और न ही कैदियों को आपस में भिडने से रोकने के लिये कोई पुख्ता इंतजाम। जेल में इस बदइंतजामी के लिये जो शख्स जिम्मेदार है वो है राजेंद्र धामणे, मुंबई की आर्थर रोड जेल का सुपिरिंटेंडेंट।
ये कोई पहली बार नहीं है कि सुपिरिंटेंडेंट राजेंद्र धामणे के कार्यकाल में इस तरह की कोई वारदात हुई हो। धामणे पहले भी कई बार विवादों में फंस चुके हैं...लेकिन बताया जाता है कि वे कुछ राजनेताओं के लाडले हैं और इसीलिये हर बार बच निकलते हैं।
जब फिल्मस्टार संजय दत्त आर्मस एक्ट में दोषी ठहराये जाने के बाद जमानत पर रिहा होकर पुणे की यरवदा जेल से बाहर निकल रहे थे उस वक्त जेल के सिपाहियों में एक फिल्मस्टार के साथ हाथ मिलाते और गले मिलते तस्वीरे खिंचवाने की होड लग गई। वे ये तक भूल गये कि संजय दत्त उन्ही की जेल के सजायाफ्ता मुजरिम हैं।ये सबकुछ हो रहा था राजेंद्र धामणे के कार्यकाल में जो कि उस वक्त यरवदा जेल के सुपिरिंटेंडेंट थे। जब मीडिया ने ये खबर दिखाई तो सरकार ने सिपाहियों को तो बर्खास्त कर दिया, लेकिन धामणे अपने सियासी रसूख के चलते कार्रवाई से बच गये।
इससे पहले साल 2002 में धामणे जब ठाणे जेल के सुपिरिटेंडेंट थे तब भी उनका स्टार प्रेम नौकरी को दरकिनार कर देखने मिला। धामणे ने कार एक्सीडैंट मामले में जेल से रिहा हो रहे सलमान खान को मीडिया के कैमरों से बचाने के लिये खुद सलमान के बॉडीगार्ड का काम किया और विशेष गेट से गुपचुप सलमान को बाहर निकाला। इसी साल जुलाई में भी आर्थर रोड जेल में गैंगवार हुआ था जिसमें अबू सलेम को अंडरवर्लड डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गे मुस्ताफ दोसा ने घायल कर दिया। उस वक्त भी धामणे की लापरवाही सामने आई थी।
मुंबई की आर्थर रोड जेल देश की संवेदनशील जेलों में से एक है। यहां तमाम बडे गैंगस्टरों के साथ साथ मुंबई हमले का आरोपी अजमल आमिर कसाब भी कैद है। ऐसे में सवाल यही उठता है कि धामणे जैसे लापरवाह और विवादित अफसर को आर्थर रोड जेल की बागडोर दिया जाना कितना सुरक्षित है।

Friday, 24 September 2010

मुंबई में मंत्री का मुंडा, बनने चला गुंडा

न छोटा राजन, न दाऊद इब्राहिम..मुंबई शहर में इन दिनों गुंडागर्दी को लेकर जो नाम बार बार खबरों में आ रहा है वो है नितेश राणे का। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री नारायण राणे के साहबजादे नितेश की कारगुजारियां बढती ही जा रहीं हैं। खुद पुलिसिया पहरे में चलने वाले नितेश राणे जब चाहें, जहां चाहें किसी को भी पीट सकते हैं। नितेश राणे की हरकतों से उनका यही मुगालता झलकता है कि बाप मंत्री है कोई क्या बिगाड लेगा।
दर्जनभर पुलिसवालों के घेरे में तनकर चलने वाले नितेश राणे को कोई छू तक नहीं सकता, लेकिन नितेश मुंबई में कभी भी किसी की भी हड्डी पसली एक कर सकते हैं। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री नारायण राणे के इस लाडले की हरकतें देखकर यही लगता है कि जल्द ही मुंबई अंडरवर्लड में छोटा राजन और दाऊद इब्राहिम के बाद अब नया नाम उभरेगा-छोटा राणे। अपने ही कार्यकर्ता चिंटू शेख पर हमले का आरोप तो सबसे ताजा है लेकिन अगर पिछले साल डेढ साल के दौरान नितेश की ओर से अंजाम दी गई वारदातों पर गौर करें तो अंदाजा मिल जाता है कि किस कदर ये छोटा राणे अपने पिता के रसूख का बेजा इस्तेमाल कर रहा है।
पहली करतूत- हाल ही में दादर रेल्वे स्टेशन पर कोंकण के लिये नई ट्रेन शुरू होते वक्त प्रदर्शन के लिये आये शिवसैनिकों पर अपने कार्यकर्ताओं से हमला करवाया। इसके बाद दोनो ही पार्टियों के बीच दंगा शुरू हो गया।
दूसरी करतूत- नितेश के संगठन स्वाभिमान ने 2 महीने पहले मुंबई के अलग अलग इलाकों में टैक्सी चलाने वालों की पिटाई की जिसके बाद शहर के तमाम टैक्सी वाले हडताल पर उतर आये।

तीसरी करतूत- चंद दिनों पहले ही मुंबई के चेंबूर इलाके में एक बिल्डर को नितेश और उसके साथियों ने जमकर पीटा, लेकिन बिल्डर ने नितेश के खौफ के कारण पुलिस में शिकायत नहीं दर्ज करवाई।

चौथी करतूत- मुंबई के खार इलाके में नितेश ने अपनी गाडी से एक पुलिस वाले का पैर कुचल दिया। पुलिस थाने में शिकायत दर्ज हुई लेकिन मामला रफा दफा कर दिया गया।

 पांचवी करतूत-  इसी साल मई में नितेश के चालीस कार्यकर्ताओं के साथ मुंबई कांग्रेस के जनरल सेक्रटरी जयवंत परब के दफ्तर पर वर्सोवा में हमला कर दिया। लाठियों और लोहे की छोडों से राणे के कार्यकर्ताओ ने सडक से गुजर रहे वाहन चालकों को भी बेवजह पीटा।

छठीं करतूत- इसी साल मार्च में नितेश राणे के कार्यकर्ताओं ने एक महिला पर पानी चोरी का आरोप लगाते हुए उसके चेहरे पर कालिख पोत कर उसे माहिम इलाके में घुमाया।

पिता नारायण राणे की बदौलत नितेश राणे न केवल हर वारदात को अंजाम देने के बाद बच जाते हैं बल्कि और नई वारदातों को अंजाम देने से भी बाज नहीं आते। अपने पिता से नितेश सियासी दांव पेंच सीख रहे नितेश ने अपने काम करने का तरीका कुछ वैसा अपनाया है जैसा तरीका अंडरवर्लड अपनाता है।

नितेश राणे ने अपना एक संगठन बनाया है जिसका नाम दिया है स्वाभिमान। वैसे तो वे इसे एक गैर राजनीतिक संगठन बताते हैं लेकिन इनके संगठन के काम करने की शिवसेना और एमएनएस सरीखे स्टाईल राजनीतिक दलों जैसी ही है यानी कि गाली गलौच, धमकी, तोडफोड और मारपीट वाली स्टाईल। ज्यादातर मामलों में लोग नितेश के डर के मारे उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने ही नहीं जाते और जिन मामलों में पुलिस शिकायत दर्ज करती भी है तो वे मामले सिर्फ कागजों पर ही रह जाते हैं। पुलिस कोई कडी कार्रवाई नहीं करती।

नितेश राणे हर वारदात के बाद बच तो निकलते हैं, लेकिन बेटे की करतूत बाप के लिये मुसीबत भी बनती नजर रही है। नारायण राणे फिर एक बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं, लेकिन जाहिर है नितेश की कारगुजारियों का फायदा कांग्रेस में ही उनके विरोधी उठाने की कोशिश कर सकते हैं।