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Tuesday, 25 March 2014

सुनो कमिश्नर। तुम्हारा डंडा यहां नहीं चलेगा !!!


खाप पंचायतों को नाहक ही बदनाम किया गया है। ये हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं। एक गोत्र में विवाह के विरोध के मामले में मैं खाप पंचायतों के साथ हूं
ये बोल हैं मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर डॉ.सत्यपाल सिंह के। बीजेपी के टिकट पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत से चुनाव लड रहे सत्यपाल सिंह, जैसी हवा वैसी दुआ वाली नीति अपना रहे हैं। बतौर क्राईम रिपोर्टर सत्यपाल सिंह को मैने खाकी वर्दी पहने, सुरक्षा कर्मियों से घिरे, मातहतों का सैल्यूट लेते हुए मुंबई में बडे रौब के साथ चलते देखा है। आज उन्ही सत्यपाल सिंह को भगवा शाल पहने, जाटों के बीच ठेठ देहाती बोली बोलते हुए, गन्नो के ढेर के बीच बैठ कर उसके रस की चुस्कियां लेते देखना दिलचस्प अनुभव था। जब सत्यपाल सिंह ने पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दिया उस वक्त उनकी सर्विस को और 2 साल बाकी थे, लेकिन जब बीजेपी ने उनके पैदाइशी जिले बागपत से टिकट देने की पेशकश की तो वर्दी उन्हें हल्की नजर आने लगी। सत्यपाल सिंह के साथ इन दिनों उनकी बेटी चारूप्रज्ञा और बेटा प्रक्रेत भी गांव गांव घूमकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। सत्यपाल के मुताबिक वे इलाके के विकास के मुद्दे पर ही चुनाव लड रहे हैं।

जिस विकास की बात सत्यपाल और यहां के दूसरे उम्मीदवार कर रहे हैं, उसकी वाकई बागपत को जरूरत नजर आती है। बागपत, राजधानी दिल्ली से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन दिल्ली से यहां तक पहुंचते पहुंचते हमें 3 घंटे लग गये। यहां की सडकों पर चलना नर्क का अनुभव करने जैसा था। स्थानीय लोगों से बात की तो कई और भी समस्याओं का पता चला। बिजली की समस्या ने न केवल इलाके में उद्योगों को प्रभावित किया है, खेती पर भी इसका असर पडा है। वैसे अब तक इस सीट का फैसला जाट वोटरों ने किया है। क्षेत्र के साढे 14 लाख वोटरों में ज्यादातर जाट हैं। दूसरा बडा तबका मुसलिम वोटरों का है।1989 तक जाटों के सबसे बडे नेता चौधरी चरणसिंह यहां से सांसद थे, जिनके बाद उनके बेटे अजीत सिंह बीते 25 सालों से इस सीट पर वर्चस्व कायम किये हुए हैं। अपवाद सिर्फ 1998 का चुनाव रहा जब एक साल के लिये बीजेपी के उम्मीदवार शास्त्री यहां से सांसद चुने गये। यहां की 70 फीसदी आबादी किसानों की है।

अजीत सिंह जाट-मुसलिम वोटरों के सहारे अब तक यहां से जीतते आये हैं, लेकिन ये जानना दिलचस्प होगा कि क्या मुजफ्फनगर के दंगों का असर यहां होगा? क्या मुसलमान राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख अजीत सिंह को वोट देंगे या फिर उनका झुकाव समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी या आम आदमी पार्टी की ओर होगा? सत्यापाल सिंह भी जाट हैं और ये देखना रोमांचक होगा कि क्या वे अजीत सिंह के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा पाते हैं?

अजीत सिंह अपनी सभाओं में ये दिखाने की कोशिश करते हैं कि सत्यपाल सिंह की उम्मीदवारी से उन्हें कोई फर्क नहीं पडेगा। हाल ही में एक चुनावी सभा में उन्होने कहा- सुना है कोई कमिश्नर खडा हुआ है यहां। सुनो कमिश्नर यहां तुम्हारा डंडा नहीं चलेगा
इलाके के विकास और खस्ताहाल सडकों के मुद्दे पर अजीत सिंह का कहना था कि ये उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। विधानसभा चुनावों में जब लोग आर.एल.डी की सरकार चुनेंगे तब ही इलाके का विकास होगा।

आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सौमेंद्र ढाका के मुताबिक सभी पार्टियां एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहीं हैं। आर.एल.डी के मौजूदा सांसद अजीत सिंह यूपीए का हिस्सा हैं, विधायक बसपा के हैं और राज्य में सरकार सपा की है, लेकिन इसके बावजूद किसी ने इलाके का विकास नहीं किया।


बागपत शहर के नाम के बारे में बताया जाता है कि इस जगह का नाम बागपत इसलिये पडा क्योंकि सैकडों साल पहले यहां पर बाघ देखे जाते थे। अब यहां बाघ तो नहीं दिखते, लेकिन 2 सिंहों की लडाई जरूर देखी जा रही है। इस लडाई में अजीत सिंह जीतते हैं या सत्यपाल सिंह या फिर कोई तीसरा ही बाजी मार ले जाता है ये जानने के लिये 16 मई तक का इंतजार करना होगा।

Monday, 10 March 2014

छोटा शकील टू महेश मांजरेकर: "आधी रात को भी फोन करना... मैं हाजिर हूं"।

राज ठाकरे की पार्टी एमएऩएस महेश मांजरेकर को लोकसभा चुनाव में बतौर उम्मीदवार उतार रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि मांजरेकर हिंदी और मराठी के एक बेहतरीन अभिनेता और निर्देशक रहे हैं। कई हिट फिल्में दी है उन्होने, लेकिन चूंकि अब वो सियासत की दुनिया में कदम रख रहे हैं तो उनके भूतकाल का पोस्टमार्टम करना अपना फर्ज है। इसी के तहत मुझे याद आई अंडरवर्ड डॉन छोटा शकील से हुई उनकी वो दोस्ताना बातचीत जिसकी रिपोर्टिंग मैन करीब 13 साल पहले की थी। इस बातचीत को मुंबई पुलिस की क्राईम ब्रांच ने रिकॉर्ड किया था। ये बातचीत 14 नवंबर 2000 को उस वक्त हुई थी जब महेश मांजरेकर, संजय दत्त, संजय गुप्ता और हरीश सुगंध के साथ शिर्डी जाते वक्त नासिक के ताज होटल में ठहरे थे।छोटा शकील को संजय दत्त ने फोन लगाया था जिसके बाद एक एक कर सभी ने शकील से गुफ्तगू की, उसका गुणगान किया। पढिये महेश मांजरेकर की क्या बातचीत हुई कराची में बैठ शकील से-

महेश मांजरेकर- सलाम वालेकुम। महेश बोल रहा हूं।
छोटा शकील- हां हां क्या हाल है ?
महेश मांजरेकर- बस फर्सट क्लास
छोटा शकील- हूं...हूं..अच्छी पिक्चर बनाते हो...देखा है..ये जो परसों रिलीज हुई अभी तक देखा नहीं। टाईम नहीं मिल रहा है।
महेश मांजरेकर- कुरूक्षेत्र ?
छोटा शकील- हां हां
महेश मांजरेकर- मेरे को एक और भी पिक्चर बनानी है। मेरे को संजय ने बोला कि आपकी स्टोरी के ऊपर एक फिल्म बनानी है।
छोटा शकील- अच्छा अच्छा अच्छा। जल्द ही फुर्सत में बात करेंगे इस मामले पर
महेश मांजरेकर- 100 परसेंट...मेरे को सच्ची मंगता है स्टोरी
छोटा शकील- हां हां मैं दे दूंगा...दो चार सीक्वेंस दे दूंगा।

महेश मांजरेकर-क्योंकि मैने अभी तक सब रियलिस्टिक पिक्चर बनाई है...वास्तव भी, कुरूक्षेत्र भी, अस्त्तिव भी...एक फिल्म बनानी है सच्ची।
छोटा शकील- हां बनाएंगे साथ में बनाएंगे...नो प्रॉब्लेम...काम तैयार करो।
महेश मांजरेकर- हां
छोटा शकील-  पूरा कॉपरेट करूंगा।
महेश मांजरेकर- 100 पर्सेंट...मरे को खाली एक स्टोरी दे दो। मैं उसका पूरा स्कीन प्ले बनाऊंगा और आपको सुनाऊंगा।
छोटा शकील- नहीं किस तरह की स्टोरी चाहिये ?
महेश मांजरेकर- हां...आपकी लाईफ पर स्टोरी बनानी है मेरे को
छोटा शकील- अच्छा ?
महेश मांजरेकर-  फिर अगर आप बताएंगे तो मैं उसको स्कीन पर बताऊंगा...आपको सुनाऊंगा पहले...अगर आप कहोगे बनाओ तो बनाएंगे।
छोटा शकील- ठीक है ठीक है
महेश मांजरेकर- हां 100 पर्सेंट बनाना चाहता हूं।
छोटा शकील- हां हां हां और क्या हाल है ?
महेश मांजरेकर- बस फर्सट क्लास सर
छोटा शकील- कोई भी बात हो जरूरी काम हो तो बोल देना
महेश मांजरेकर- 100 पर्सेंट भाई।
छोटा शकील- हां तो कभी भी आधी रात को भी मैं हाजिर हूं आप लोगों के लिये...फिक्र मत करना।
महेश मांजरेकर- 100 पर्सेंट भाई।
छोटा शकील- जरा उसको फोन देना (संजय दत्त को)

बातचीत से एक बात साफ है कि महेश मांजरेकर, छोटा शकील पर फिल्म बनाने का ऑफर देकर उसे खुश कर रहे हैं। यहां सवाल ये उठता है कि छोटा शकील को महिमामंडित करते हुए मांजरेकर उसपर क्यों फिल्म बनाना चाह रहे थे। जवाब भी शायद इसी बातचीत में छुपा है जब शकील मांजरेकर से कहता है- कभी भी आधी रात को भी मैं हाजिर हूं आप लोगों के लिये...फिक्र मत करना एक खतरनाक अंडरवर्लड डॉन जो कि एक दुश्मन मुल्क से ऑपरेट करता है ने ,जब आपके सिर पर हाथ रख दिया तो समझिये कि आप शेर हो गये।
बहरहाल, इस बातचीत को मुंबई पुलिस ने भरत शाह के खिलाफ उस वक्त चल रहे मकोका के मामले में बतौर सबूत पेश किया। सरकारी वकील रोहिणी सलियन के मुताबिक जब मांजरेकर को कठघरे में खडा कर सवाल पूछा गया तो उन्होने ये तो कबूल किया कि ऐसी बातचीत हुई थी, लेकिन जिससे वो बातचीत कर रहे थे वो छोटा शकील था ये उन्हें नहीं मालूम। वाह!  आप जिस शख्स पर फिल्म बनाने की पेशकश कर रहे हैं, जिससे उसकी जिंदगी की कहानी जानने के लिये गिडगिडा रहे हैं वो कौन है ये आपको नहीं मालूम? मांजरेकर भले ही अदालत में गवाही के दौरान आंशिक रूप से मुकर गये हों, लेकिन बातचीत होते वक्त मौजूद हरीश सुगंध ने अदालत में सबकुछ कबूल कर लिया।


इस बातचीत का राजनीतिक पार्टियां चाहे जो भी मतलब निकालें, लेकिन महेश मांजरेकर को चुनाव के दौरान ये जरूर पता लग जायेगा कि राजनीति के कुरूक्षेत्र में जाने का मतलब वास्तव में काजल की कोठरी में घुसना होता है।