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Thursday, 18 September 2008

मुंबई में बेफिक्र घूम रहा है दाऊद

दाऊद इब्राहिम इन दिनों मुंबई की सडकों पर बेफिक्र घूम रहा है। उसे न तो छोटा राजन से डर है और न ही पुलिस से। वो अपने साथ पंटरों को भी नहीं रखता। लोग भी उससे नहीं डरते... अगर आप समझ रहे हैं कि हम किसी फिल्मी या फिर दाऊद जैसे दिखने वाले किसी शख्स की बात कर रहे हैं तो आप गलत हैं।
आप सोच रहे होंगे कि दाऊद इतना बेखौफ होकर मुंबई में क्यों घूम रहा है, क्या उसने अंडरवर्लड में अपने दुश्मनों से सुलह कर ली है और क्या भारतीय जांच एजेंसियों ने दाऊद के तमाम काले कारनामों की फाईल बंद कर दी है।आखिर माजरा क्या है?

शेक्सपियर ने कहा था कि नाम में क्या रखा है, लेकिन इस व्यकित के नाम ने इसकी जिंदगी में फर्क ला दिया है। मुंबई के मसजिद बंदर इलाके में रहनेवाले इस वय्कित का नाम है दाऊद और अंडरवर्लड वाले दाऊद की तरह ही इसके पिता का भी नाम इब्राहिम ही है, यानी कि ये भी है दाऊद इब्राहिम। 1980 के दशक तक इस शख्स की जिंदगी में सब ठीक ठाक था, लेकिन उसके बाद दाऊद इब्राहिम जब मुंबई अंडरवर्लड का बहुत बडा नाम बन गया और दुबई से बैठ कर अपना कालाकारोबार चलाने लगा तो नतीजतन इस दाऊद की जिंदगी में भी दिक्कतें पेश आनें लगीं। मुंबई पुलिस अपराधी दाऊद के चक्कर में कई बार इनको शक के घेरे में ले लेती। मतदान बूथ पर भी जब ये वोट डालने जाते तो अधिकारी इनका नाम सुनकर चौंक जाते।

इन दाऊद के एक रिश्तेदार दुबई में थे और जिन दिनों मोबाईल फोन का आगमन नहीं हुआ था, ये पीसी बूथ से दुबई फोन करते थे। एक बार इन्हें पता चला कि इनके फोन करने के बाद पुलिस अपराधी दाऊद इब्राहिम का सुराग पाने के लिये उस पीसीओ वाले को ही पकड ले गई।

मुंबई के इस सीधे सादे दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तान में छुपे बैठे भगोडे दाऊद इब्राहिम के चरित्र में भले ही जमीन आसमान का अंतर हो, लेकिन दोनो में कई समानताएं भी हैं।
दोनों की उम्र 50 के करीब है। दोनों के पिता का नाम इब्राहिम है, दोनों की बहन का नाम हसीना है, दोनों के 6 भाई हैं, दोनों के एक-एक भाई की असमय मौत हो चुकी है, दोनों महाराष्ट्र के रत्मागिरी जिले के हैं और दोनों की मातृभाषा कोंकणी है। एक और बात भी दोनों में समान है। दोनों का लेना देना पिस्तौल है। एक दाऊद इब्राहिम पिस्तौल से लोगों पर गोलियां बरसवाता है तो मुंबई का ये दाऊद इब्राहिम पहले पिस्तौल रिपेर के निजी कारखाने में काम करता था।

Friday, 12 September 2008

लालबाग के राजा के दरबार में भक्तों से भेदभाव

लोग घंटों कतार में खडे रहकर लालबाग के राजा के दरबार में उनकी एक झलक पाने के लिये पहुंचते हैं, लेकिन मूर्ति के पास पहुंचते ही आसपास खडे कार्यकर्ता उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव करते हैं। महिला और बच्चों का भी ख्याल नहीं किया जाता। जो कार्यकर्ता किसी फिल्मी सितारे या राजनेता के पहुंचने पर उनकी आवभगत में जुट जाते हैं, वे ही आम श्रद्धालुओं को जरा सी भी देर होने पर धक्के मारकर पंडाल से बाहर कर देते हैं।
एक महिला घंटो कतार में खडी रहकर लालबाग के राजा के दर्शनों के लिये आई थी॥राजा के दर्शन तो उसने कर लिये लेकिन उसके बाद जो सलूक उसके साथ हुआ वो इंसानियत को शर्मसार करता है। बडे अपमानजनक तरीके से एक कार्यकर्ता ने महिला को धक्के देकर मंच से बाहर कर दिया। महिला के साथ बदसलूकी करने वाल उस कार्यकर्ता के तेवर किसी गुंडे से कम नहीं थे। वो ये भी भूल गया कि ये गणपति का दरबार है और भक्त यहां बडी श्रद्धा के साथ आते हैं। ये तो था गणेशजी के एक आम भक्त के साथ कार्यकर्ताओं की ओर से किया जाने वाला सलूक, लेकिन जहां कोई फिल्मी हस्ती या राजनेता यहां पहुंचा नहीं कि मंडल के बडे पदाधिकारियों समेत यही कार्यकर्ता उसकी आवभगत के लिये दौड पडते हैं..मानो उस राजनेता या फिल्मी हस्ती ने लालबाग के राजा के पास आकर इनपर बडा अहसान कर दिया हो। इस भेदभाव के कई श्रद्धालु शिकार हो चुके हैं और कडवे अनुभवों के साथ लालबाग के राजा के दरबार से लौटे हैं
लालबाग के राजा के दरबार में तैनात इन कार्यकर्ताओं के गुरूर की कोई की कोई सीमा नहीं। फिल्मी सितारों की भीड के बीच खुद को पाकर ये खुद को भी किसी स्टार से कम नहीं समझते। इसी नशे में श्रद्धालुओं से बदतमीजी करते वक्त वे न तो उनकी उम्र का ख्याल करते हैं और न ही महिलाओं से शालीनता बरतते हैं। इस बारे में मंडल के पदाधिकारियों ने बस अपनी सफाई में यही कहा कि लालबाग के राजा के दर्शनों के लिये लाखों लोग आते हैं। कार्यकर्ता दिन रात एक करके भीड को नियंत्रित कर रहे हैं। ऐसे में इस तरह की बातों को नजरअंदाज करना चाहिये। प्रबंधन भले ही अपने कार्यकर्ताओं की करतूतों को नजरअंदाज कर रहा हो, लेकिन जिनके साथ बदसलूकी हुई है उनके लिये अपने अनुभव को भूलना आसान नहीं।
लालबाग के राजा के दरबार में आनेवालों के मन में अब सवाल उठ रहा है कि क्या लालबाग के राजा सिर्फ फिल्मी सितारों या राजनेताओं के ही राजा बन गये हैं और क्या आम लोगों के साथ होने वाली बदसलूकी के मद्देनजर यहां का प्रबंधन सरकार को अपने हाथों में नहीं ले लेना चाहिये।

Friday, 5 September 2008

मुंबई पुलिस का गैंगवार

गैंगवार। मतलब अंडरवर्लड की काली दुनिया के बीच गिरोहों की आपसी जंग...लेकिन ये गैंगवार सिर्फ अब अंडरवर्लड में ही नहीं होता। अंडरवर्लड के दुश्मन यानी कि पुलिस महकमें में भी एनकाउंटर स्पेलिस्ट अफसरों के बीच चलता है आपसी गैंगवार।हाल ही में मुंबई पुलिस के एनकाउंटर स्पेसलिस्ट अफसर प्रदीप शर्मा की वर्दी उतारे जाने के पीछे इस पुलिसिया गैंगवार की भी एक भूमिका मानी जा रही है।
मुंबई की सडके कई बार खून से सन चुकीं हैं, कई बार यहां जीते जागते इंसान ढेर में बदले गये हैं, कई बार यहां हो चुकी है गोलियों की बौछार। वजह रही है गैंगवार। अंडरवर्लड पर दबदबा हासिल करने के लिये गिरोहों के बीच चलने वाला खूनी खेल। पहले ये गैंगवार दाऊद इब्राहिम और अरूण गवली के गिरोहों के बीच चलता था और फिर छोटा राजन का गिरोह दाऊद का नया दुश्मन बनकर उभरा। सभी एक दूसरे के खून के प्यासे थे।दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन, अरूण गवली या फिर अश्विन नाईक भले ही आपस में भी लड मरें लेकिन इन सभी की एक ही दुश्मन है-मुंबई पुलिस। पर खुद क्या मुंबई पुलिस भी गैंगवार से अछूती है। मुंबई के तमाम क्राईम रिपोर्टर भी जानते हैं कि मुंबई पुलिस में भी पिछले डेढ दशक से एक गैंगवार चल रहा था दो एनकाउंटर स्पेसलिस्ट अफसरों के बीच।

प्रदीप शर्मा उर्फ बाबा- रविवार को पुलिस सेवा से बर्खास्तगी से पहले ये 112 एनकाउंटर कर चुके थे। एक एनकाउंटर स्पेसलिस्ट अफसर के तौर पर पहचाने जाने वाले शर्मा पुलिस महकमें में होने वाले गैंगवार के भी अहम खिलाडी रहे हैं। 1983 में इन्होने विजय सालस्कर उर्फ महाराज के साथ पुलिस भर्ती की परीक्षा पास की और सब इंसपेक्टर नियुक्त हुए। 90 के दशक की शुरूवात तक दोनों ने साथ काम किया। कई गुनहगारों को यमलोक पहुंचाया और कईयों को सलाखों के पीछे, लेकिन शर्मा और सालस्कर का साथ ज्यादा दिनों तक नहीं टिका। दोनों में तमाम बातों को लेकर मनमुटाव शुरू हो गया दोनो ने अलग होकर अपने खास अफसरों के अलग गुट बनाये। आला अफसरों के पास दोनो गिरोह एक दूसरे के कान भरते, एक दूसरे के खबरियों का एनकाउंटर करते या एक दूसरे के करीबियों को सलाखों के पीछे पहुंचाते। ये भी बताया जाता है कि दोनों अपने दुश्मन गुटों के फोन भी टेप करते थे। जब सालस्कर और शर्मा अलग हुए तो 1995 से प्रदीप शर्मा ने सब इंस्पेकटर दया नायक को साथ ले लिया। दोनो ने मिलकर करीब 83 एनकाउंटर किये। इस बीच शर्मा की टीम में एंट्री हुई सचिन वाजे की। इसी दौरान शर्मा की टीम में फूट आई। वाजे बमकांड आरोपी ख्वाजा यूनूस की हत्या के मामले में गिरफ्तार हुए और उसी के चंद दिनों बाद दया नायक भी शर्मा से मनमुटाव के चलते अलग हो गये। बताते हैं कि जब नायक आये से ज्यादा संपत्ति के मामले में गिरफ्तार हुए तो शर्मा से उन्हे कोई मदद नहीं मिली।

इस पुलिसिया गैंगवार का एक और पहलू था। जो भी आईपीएस अफसर क्राईम ब्रांच का मुखिया बनता वो अपने कास एनकाउंटर स्पेलिस्ट अफसरो को उसकी मनचाही पोस्टिंग देता था। न केवल क्राईम ब्रांच की प्राथमिकताएं इन एनकाउंटर स्पेसलिस्ट अफसरों की सलाह पर तय की जातीं बल्कि सभी अहम पदों पर ट्रांसफर्स भी इन्ही की सिफारिश पर होते।प्रदीप शर्मा पुणे के पुलिस कमिश्नर डॉ सत्यपाल सिंह के काफी करीबी माने जाते रहे हैं, जबकि विजय सालस्कर क्राईम ब्रांच के मौजूदा प्रमुख राकेश मारिया के। क्राईम ब्रांच की सबसे ताकतवर ईकाई होती है एंटी एक्टोर्शन सेल। सत्यपाल सिंह के वक्त इस सेल के मुखिया शर्मा थे तो अब मारिया के वक्त हैं विजय सालस्कर। शर्मा की बर्खास्तगी को मुंबई पुलिस के गलियारों में सालस्कर खेमें की जीत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

मोनिका बेदी का सच

मोनिका बेदी ने हाल ही में कुछ पत्र पत्रिकाओं में इंटरव्यू देकर बताया था कि किस तरह से वो अंडरवर्लड डॉन अबू सलेम के चंगुल में फंस गई। पर मुंबई पुलिस की क्राईम का मानना है कि इसमें थोडी हकीकत और काफी फसाना है। एक ऐसे शख्स का बयान पुलिस के पास है जो मोनिका बेदी को उस वक्त से जानता है जब बॉलीवुड में उसकी एंट्री हुई थी। इस बयान के मुताबिक मोनिका को अच्छी तरह से मालूम था कि वो काली दुनिया के एक बेहद खतरनाक आदमी से रिश्ते बढा रही थी।

मुकेश दुग्गल के साथ पहला अफेयर
मोनिका बेदी का पहला अफेयर मुकेश दुग्गल के साथ हुआ था। मोनिका और दुग्गल एक दूसरे के साथ पति पत्नी की तरह रहते थे। ये बात मुकेश दुग्गल की बीवी को पता थी इसलिये उनके बीच आये दिन झगडे होते रहते थे। मुकेश दुग्गल की हत्या हुई तो मोनिका और मुकेश की बीवी के बीच प्रोपर्टी के किसी पेपर्स को लेकर काफी बहस हुई थी। मुकेश दुग्गल की पत्नी को शक था कि उसके पत्नी ने मौत से पहले प्रोपर्टी के पेपर्स को दिये थे। मुकेश दुग्गल की बीवी के कारण अबू सलेम ने मोनिका बेदी को उन पेपर्स के सिलसिले में जानकारी के लिये फोन किया था। इस तरह से मोनिका पहली बार अबू सलेम के संपर्क में आई और धीरे धीरे उनमें दोस्ती बढती गई। मोनिका को शुरू से ही पता था कि वो किससे दोस्ती कर रही है और अबू सलेम कौन था।

अंडरवर्लड की प्रॉब्लम मोनिका ने संभाला
उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में बॉलीवुड का बडा दबदबा था और गैंगस्टर से दोस्ती होना एक बडी बात थी। जब मोनिका और सलेम के बीच फोन पर बातों का ये सिलसिला चल रहा था तब मोनिका एक फिल्म की शूटिंग में जुटी थी। उस फिल्म के प्रोड्यूसर डाईरेक्टर का अंडरवर्लड से जो प्रॉब्लम हुआ था उसे मोनिका ने ही संभाला था।
(अबू सलेम पहले दाऊद इब्राहिम के लिये ही काम करता था। 1997 में गुलशन कुमार की हत्या के बाद सलेम, दाऊद इब्राहिम के गिरोह से अलग हो गया, लेकिन अलग होने से पहले दाऊद को सलेम और मोनिका के चक्कर की जानकारी थी।)

सलेम के साथ मोनिका की पाकिस्तान में मिलती थी।
मोनिका बेदी अबू सलेम से मिलने पाकिस्तान गई थी। उस वक्त सलेम डी कंपनी के लिये काम करता था। दाऊद इब्राहिम को भी मोनिका बेदी का पाकिस्तान आकर सलेम के साथ होटल में रूकना पता था। सलेम कई बार मोनिका से भारत के बाहर मिला। कभी दुबई में तो कभी पाकिस्तान में। आने-जाने ठहरने का सारा खर्च सलेम देता था। मोनिका हर बार उसके पास से महंगे गिफ्ट जैसे डायमंड ज्वेलरी वगैरह लेकर वापस लौटती थी।

संजय दत्त की भाभी मोनिका बेदी
जब मोनिका अबू सलेम से शादी करने के लिये अमेरिका जा रही थी, तब उसकी गोविंदा और संजय दत्त के साथ जोडी नंबर वन फिल्म की आखिरी शूटिंग जूहू के एक होटल में हो रही थी। वहीं मोनिका ने एक ज्वेलर से 10 लाख रूपये का डायमंड मंगवाया था। वो उसे सलेम को शादी के तोहफे के तौर पर देना चाहती थी। जोडी नंबर वन की पूरी यूनिट को सलेम और मोनिका के रिश्तों के बारे में पता था। इसी वजह से शूटिंग पर संजय दत्त मोनिका को भाभी कहकर पुकारता था।

मां-बाप से झूठ बोलती थी मोनिका
मोनिका की मां को लकवा मार गया था। मोनिका अपने मांबाप से भी झूठ बोलती थी। उसने अपने मांबाप से भी अबू सलेम के साथ शादी की बात छुपाकर रखी थी। जब मीडिया के जरिये मोनिका के मां बाप तक उनकी शादी की खबर पहुंची तो उसने अपने मां बाप से कहा कि ये सब झूठ है।
जब मोनिका की फिल्मे भारत में रिलीज हुईं तो मोनिका सलेम के साथ बाहर थी। वो वापस भारत आना चाहती थी, लेकिन जब सलेम के साथ उसके रिश्तों की खबरे मीडिया में छपीं तब उसे लगा कि वो वापस भारत नहीं लौट सकेगी।वहीं जाकर उसे अपनी गलती का अहसास हुआ।

मोनिका को पीटता था सलेम
इस दौरान सलेम और मोनिका के बीच काफी झगडे होने लगे और सलेम मोनिका को काफी पीटता था। सलेम दुनिया के जिस भी देश में जाकर रहता वो मोनिका को अडोस पडोस के लोगों के संपर्क में बिलकुल नहीं आने देता।

मोनिका की अंग्रेजी
सफर के दौरान सलेम हमेशा मोनिका को अपने साथ रखता था।मोनिका को अच्छी अंग्रेजी आती थी, जबकि सलेम ढंग से अंग्रेजी नहीं बोल पाता था। अधिकारियों से कोई बात करनी हो तो मोनिका ही करती थी। मोनिका एक अच्छे घर की लडकी दिखती थी इसलिये एयरपोर्ट पर कोई ज्यादा पूछताछ नहीं करता था। मोनिका की वजह से सलेम के कई काम आसान हो गये थे।

सलेम की पहली पत्नी और मोनिका की मुलाकात
अमेरिका में मोनिका की मुलाकात सलेम की पहली पत्नी समीरा से भी हुई थी। बातचीत में दोनों ने आपस में एक दूसरे को ये बात बताई कि सलेम उन्हे पीटता है और वो औरतों की जरा भी इज्जत नहीं करता। एक बार मोनिका, सलेम के चंगुल से निकल भागने में कामियाब भी हुई और नॉर्वे अपने घर पहुंच गई। समीरा ने उसे भागने में मदद की थी और भागने के बाद भी वो समीरा के संपर्क में थी। अबू सलेम तब उसे लेने के लिये नॉर्वे पहुंचा। वो काफी असुरक्षित महसूस कर रहा था। वो मानता था कि मोनिका के एकाउंट में 2-3 करोड रूपये हैं और उसके पास 1 करोड रूपये की ज्वेलरी है। सलेम, समीरा को फोन करके कहता था कि वो मोनिका को मार देगा। बाद में मोनिका और सलेम के बीच सुलह हो गई और दोनो साथ रहने लगे।