Search This Blog

Friday, 12 September 2008

लालबाग के राजा के दरबार में भक्तों से भेदभाव

लोग घंटों कतार में खडे रहकर लालबाग के राजा के दरबार में उनकी एक झलक पाने के लिये पहुंचते हैं, लेकिन मूर्ति के पास पहुंचते ही आसपास खडे कार्यकर्ता उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव करते हैं। महिला और बच्चों का भी ख्याल नहीं किया जाता। जो कार्यकर्ता किसी फिल्मी सितारे या राजनेता के पहुंचने पर उनकी आवभगत में जुट जाते हैं, वे ही आम श्रद्धालुओं को जरा सी भी देर होने पर धक्के मारकर पंडाल से बाहर कर देते हैं।
एक महिला घंटो कतार में खडी रहकर लालबाग के राजा के दर्शनों के लिये आई थी॥राजा के दर्शन तो उसने कर लिये लेकिन उसके बाद जो सलूक उसके साथ हुआ वो इंसानियत को शर्मसार करता है। बडे अपमानजनक तरीके से एक कार्यकर्ता ने महिला को धक्के देकर मंच से बाहर कर दिया। महिला के साथ बदसलूकी करने वाल उस कार्यकर्ता के तेवर किसी गुंडे से कम नहीं थे। वो ये भी भूल गया कि ये गणपति का दरबार है और भक्त यहां बडी श्रद्धा के साथ आते हैं। ये तो था गणेशजी के एक आम भक्त के साथ कार्यकर्ताओं की ओर से किया जाने वाला सलूक, लेकिन जहां कोई फिल्मी हस्ती या राजनेता यहां पहुंचा नहीं कि मंडल के बडे पदाधिकारियों समेत यही कार्यकर्ता उसकी आवभगत के लिये दौड पडते हैं..मानो उस राजनेता या फिल्मी हस्ती ने लालबाग के राजा के पास आकर इनपर बडा अहसान कर दिया हो। इस भेदभाव के कई श्रद्धालु शिकार हो चुके हैं और कडवे अनुभवों के साथ लालबाग के राजा के दरबार से लौटे हैं
लालबाग के राजा के दरबार में तैनात इन कार्यकर्ताओं के गुरूर की कोई की कोई सीमा नहीं। फिल्मी सितारों की भीड के बीच खुद को पाकर ये खुद को भी किसी स्टार से कम नहीं समझते। इसी नशे में श्रद्धालुओं से बदतमीजी करते वक्त वे न तो उनकी उम्र का ख्याल करते हैं और न ही महिलाओं से शालीनता बरतते हैं। इस बारे में मंडल के पदाधिकारियों ने बस अपनी सफाई में यही कहा कि लालबाग के राजा के दर्शनों के लिये लाखों लोग आते हैं। कार्यकर्ता दिन रात एक करके भीड को नियंत्रित कर रहे हैं। ऐसे में इस तरह की बातों को नजरअंदाज करना चाहिये। प्रबंधन भले ही अपने कार्यकर्ताओं की करतूतों को नजरअंदाज कर रहा हो, लेकिन जिनके साथ बदसलूकी हुई है उनके लिये अपने अनुभव को भूलना आसान नहीं।
लालबाग के राजा के दरबार में आनेवालों के मन में अब सवाल उठ रहा है कि क्या लालबाग के राजा सिर्फ फिल्मी सितारों या राजनेताओं के ही राजा बन गये हैं और क्या आम लोगों के साथ होने वाली बदसलूकी के मद्देनजर यहां का प्रबंधन सरकार को अपने हाथों में नहीं ले लेना चाहिये।

2 comments:

फ़िरदौस ख़ान said...

लालबाग के राजा के दरबार में आनेवालों के मन में अब सवाल उठ रहा है कि क्या लालबाग के राजा सिर्फ फिल्मी सितारों या राजनेताओं के ही राजा बन गये हैं और क्या आम लोगों के साथ होने वाली बदसलूकी के मद्देनजर यहां का प्रबंधन सरकार को अपने हाथों में नहीं ले लेना चाहिये।

सही सवाल उठाया है आपने...

निशाचर said...

सब चढावे और publicity का खेल है भैया ....... पब्लिक तो नादाँ है जो यूँ ही पहुँच जाती है जलालत झेलने. क्या घर में ईश्वर कि आराधना नहीं हो सकती जो इन दूकानदारों के दर तक जाना पड़ता है ??? एक बार पब्लिक जाना बंद कर दे तो इनका दिमाग ठिकाने आ जायेगा .