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Wednesday, 11 June 2008

हाई टाईड आने की आशंका !

एक बार फिर कुछ शब्द न्यूज चैनलों पर मुंबईया बारिश के कवरेज को लेकर....
4 दिनों पहले एक राष्ट्रीय चैनल पर लाईव हो रहा था। रिपोर्टर मुंबई के एक समुद्र तट पर खडा था और एंकर उससे बारिश से शहर के जनजीवन पर होने वाले असर को लेकर सवाल पूछ रहा था। अचानक एंकर ने रिपोर्टर से एक सवाल पूछा जिससे मै चौंक पडा – क्या पुणे में भी हाई टाईड आने की आशंका है ?
इस सवाल से मुझे हंसी भी आई और गुस्सा भी।
एंकर महोदय को कौन समझाये कि हाईटाईड कोई भूकंप या चक्रवात नहीं है, जिसके की आने की आशंका हो। ये तो समुद्र में होने वाली दैनिक क्रिया है , जिसका संबंध चांद की गुरूत्वाकर्षण शकित से जुडा है। जिस तरह हम सांसे लेते हैं उसी तरह से समुद्र में रोज ज्वार भाटा आता है। हाई टाईड यानी ज्वार से मुंबई में दिक्कत सिर्फ तब ही होती है जब भारी बारिश के साथ इसका मेल हो जाये। हाई टाईड के वक्त ऊंची लहरें उठतीं हैं और इससे होता ये है कि मुंबई के मल निकासी सिस्टम से जो गंदा पानी समुद्र की ओर जाना होता है वो निकल नहीं पाता और इसकी वजह से शहर में जगह जगह पानी भर जाता है, ट्रेन सेवाओं पर असर पडता है और लोगों को कई तरह की परेशानियां झेलनीं पडतीं हैं। खासकर भारी बारिश वाले जिस दिन 4.50 मीटर से ऊंची लहरें उठतीं हैं उसी दिन मुंबई में दिक्कत होती है।

दूसरी बात कि हाईटाईड पुणे में नहीं आता क्योंकि वहां तो कोई समुद्र है ही नहीं।

उस रिपोर्टर ने एंकर के मूर्खतापूर्ण सवाल को अपने जवाब से संभाल लिया और पूरी बात उसे ऑन एयर समझाई।
बहरहाल, जब तक संपादक टीवी पत्रकारों की बौद्धिक क्षमता आंके बगैर अपने चाटुकारों और कन्याओं को महज उनकी खूबसूरती के आधार पर एंकर बनाते रहेंगे, न्यूज चैनलों पर मनोरंजन के ऐसे मौके आते रहेंगे। वैसे भी अब न्यूज चैनलों पर न्यूज के बजाय सिर्फ मनोरंजन ही तो मिलता है। एऩजॉय द शो।

Tuesday, 10 June 2008

सावधान! ये बारिश फर्जी है

मुंबई में अगर कोई एक मौसम तकलीफ देता है तो वो है मानसून। हर साल जून से लेकर अगस्त के बीच आपको तमाम टीवी चैनलों पर एक जैसी तस्वीरें देखने मिलेंगीं। वही सडकों पर भरा पानी, उसमें फंसे वाहन, वही पटरियों पर फंसीं लोकल ट्रेनें और छाता लगाकर उसके किनारे चलते लोग। मिलन सबवे, खार सबवे, मालाड सबवे जैसी जगहों के नाम राष्ट्रीय चैनलों पर इतनी बार पिछले चंद सालों में चल चुके हैं कि लगता है जल्द ही वे कुतुब मिनार की तरह मशहूर हो जायेंगे। आज सुबह 8 बजे के करीब भी मैने एक राष्ट्रीय चैनल पर ऐसी ही तस्वीरें चलतीं देखीं। तस्वीरों के साथ रिपोर्टर का फोनो भी चल रहा था कि मुंबई में सबकुछ अस्तव्यस्त हो गया है, त्राही त्राही मच गई है, लोकल ट्रेन लेट हो गई है। सारे सबवे भर चुके हैं वगैरह वगैरह.....उस चैनल पर ये खबर देख मैने इस ख्याल के साथ एक लंबी सांस ली कि लगता है आज भी बारिश के कवरेज पर ही रिपोर्टरों की पूरी फोर्स लगानी होगी। दूसरी खबरों पर काम नहीं हो पायेगा।
इसी उलझन के साथ मैं घर की बालकनी में पहुंचा। बाहर देखा तो चौंक पडा। सडक गिली थी, लेकिन भारी बारिश हुई हो ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा था। कुछ देर पहले हल्की फुहारें पडी होंगीं बस इसका अंदाजा आ रहा था।

मैने अपने नाईट रिपोर्टर को फोन किया।
क्या रात को बहुत बरसात हुई ?
नहीं सिर्फ हल्की फुल्की बारिश सुबह के वक्त हुई थी।
क्या ट्रेनें और बसें देर से चल रहीं हैं ?
नहीं। कंट्रोल चैक किया। सब सामान्य है। सुबह की शिफ्ट के सारे कर्मचारी भी वक्त पर पहुंचे हैं। किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई।

मेरे रिपोर्टर की जानकारी उस राष्ट्रीय चैनल पर दिखाई जा रही तस्वीरों के बिलकुल विपरीत थी। तसल्ली के लिये मैने विलेपार्ले में रहने वाले एक और रिपोर्टर को फोन किया।
क्या तुम्हारे इलाके में भारी बारिश हो रही है और पानी भरा है ?
नहीं तो...यहां तो अब धूप निकली है
ट्रेन लेट है क्या ?
नहीं टाईम पर है। मैं ऑफिस आने के लिये स्टेशन पर खडा हूं।

मैने टीवी पर फिर वही चैनल लगाया। ध्यान से देखने पर पूरा माजरा समझ में आ गया। दरअसल ये तस्वीरें पिछले शनिवार की थीं, जब वाकई में बारिश ने मुंबई में कहर बरपाया था। इस चैनल ने आज वही तस्वीरें दिखाई ये बताते हुए कि ये आज की तस्वीरें है। झूठ, अविश्वनीयता और धोखेबाजी का उस चैनल पर “लाईव प्रसारण” हो रहा था। लोगों को बेवजह डराने का गुनाह कर रहा था ये चैनल और अक्सर ऐसा करने वाले करने वाले कई और भी चैनल हैं।

टीआरपी की अंधी दौड में कुछ न्यूज चैनलों की ऐसी हरकतें ही टीवी पत्रकारों और चैनलों के समाज में सम्मान और विश्वनीयता को मटियामेट कर रहीं है। ऐसी करतूतों की वजह से ही न्यूज चैनल मजाक का विषय बनते जा रहे हैं। इन्हीं की वजह से महाराष्ट्र सरकार को इतनी हिम्मत आ गई है कि वो बात बात पर टीवी चैनलों को धमकाती है। परसों ही सरकार की ओर से ये चेतावनी आई कि अगर कोई टीवी चैनल बारिश की पुरानी तस्वीरों को बिना फाईल का स्लग दिये चलाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी और जिम्मेदार व्यकित को जेल में ठूंसा जायेगा। आखिर ऐसी नौबत आई ही क्यों ???जाहिर है हम टीवी पत्रकारों की बीच ही कुछ ऐसी ओछी मानसिकता के लोग भर गये हैं जिन्हें न तो इस व्यवसाय की गरिमा की कोई परवाह है और न ही समाज की। एक टीवी पत्रकार होने के नाते मैं ऐसे पाप का विरोध करता हूं और अपने आप से ये वादा करता हूं कि कम से कम अपने कार्यक्षेत्र में ऐसी हरकतों की गुंजाईश नहीं बनने दूंगा।