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Tuesday, 10 June 2008

सावधान! ये बारिश फर्जी है

मुंबई में अगर कोई एक मौसम तकलीफ देता है तो वो है मानसून। हर साल जून से लेकर अगस्त के बीच आपको तमाम टीवी चैनलों पर एक जैसी तस्वीरें देखने मिलेंगीं। वही सडकों पर भरा पानी, उसमें फंसे वाहन, वही पटरियों पर फंसीं लोकल ट्रेनें और छाता लगाकर उसके किनारे चलते लोग। मिलन सबवे, खार सबवे, मालाड सबवे जैसी जगहों के नाम राष्ट्रीय चैनलों पर इतनी बार पिछले चंद सालों में चल चुके हैं कि लगता है जल्द ही वे कुतुब मिनार की तरह मशहूर हो जायेंगे। आज सुबह 8 बजे के करीब भी मैने एक राष्ट्रीय चैनल पर ऐसी ही तस्वीरें चलतीं देखीं। तस्वीरों के साथ रिपोर्टर का फोनो भी चल रहा था कि मुंबई में सबकुछ अस्तव्यस्त हो गया है, त्राही त्राही मच गई है, लोकल ट्रेन लेट हो गई है। सारे सबवे भर चुके हैं वगैरह वगैरह.....उस चैनल पर ये खबर देख मैने इस ख्याल के साथ एक लंबी सांस ली कि लगता है आज भी बारिश के कवरेज पर ही रिपोर्टरों की पूरी फोर्स लगानी होगी। दूसरी खबरों पर काम नहीं हो पायेगा।
इसी उलझन के साथ मैं घर की बालकनी में पहुंचा। बाहर देखा तो चौंक पडा। सडक गिली थी, लेकिन भारी बारिश हुई हो ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा था। कुछ देर पहले हल्की फुहारें पडी होंगीं बस इसका अंदाजा आ रहा था।

मैने अपने नाईट रिपोर्टर को फोन किया।
क्या रात को बहुत बरसात हुई ?
नहीं सिर्फ हल्की फुल्की बारिश सुबह के वक्त हुई थी।
क्या ट्रेनें और बसें देर से चल रहीं हैं ?
नहीं। कंट्रोल चैक किया। सब सामान्य है। सुबह की शिफ्ट के सारे कर्मचारी भी वक्त पर पहुंचे हैं। किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई।

मेरे रिपोर्टर की जानकारी उस राष्ट्रीय चैनल पर दिखाई जा रही तस्वीरों के बिलकुल विपरीत थी। तसल्ली के लिये मैने विलेपार्ले में रहने वाले एक और रिपोर्टर को फोन किया।
क्या तुम्हारे इलाके में भारी बारिश हो रही है और पानी भरा है ?
नहीं तो...यहां तो अब धूप निकली है
ट्रेन लेट है क्या ?
नहीं टाईम पर है। मैं ऑफिस आने के लिये स्टेशन पर खडा हूं।

मैने टीवी पर फिर वही चैनल लगाया। ध्यान से देखने पर पूरा माजरा समझ में आ गया। दरअसल ये तस्वीरें पिछले शनिवार की थीं, जब वाकई में बारिश ने मुंबई में कहर बरपाया था। इस चैनल ने आज वही तस्वीरें दिखाई ये बताते हुए कि ये आज की तस्वीरें है। झूठ, अविश्वनीयता और धोखेबाजी का उस चैनल पर “लाईव प्रसारण” हो रहा था। लोगों को बेवजह डराने का गुनाह कर रहा था ये चैनल और अक्सर ऐसा करने वाले करने वाले कई और भी चैनल हैं।

टीआरपी की अंधी दौड में कुछ न्यूज चैनलों की ऐसी हरकतें ही टीवी पत्रकारों और चैनलों के समाज में सम्मान और विश्वनीयता को मटियामेट कर रहीं है। ऐसी करतूतों की वजह से ही न्यूज चैनल मजाक का विषय बनते जा रहे हैं। इन्हीं की वजह से महाराष्ट्र सरकार को इतनी हिम्मत आ गई है कि वो बात बात पर टीवी चैनलों को धमकाती है। परसों ही सरकार की ओर से ये चेतावनी आई कि अगर कोई टीवी चैनल बारिश की पुरानी तस्वीरों को बिना फाईल का स्लग दिये चलाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी और जिम्मेदार व्यकित को जेल में ठूंसा जायेगा। आखिर ऐसी नौबत आई ही क्यों ???जाहिर है हम टीवी पत्रकारों की बीच ही कुछ ऐसी ओछी मानसिकता के लोग भर गये हैं जिन्हें न तो इस व्यवसाय की गरिमा की कोई परवाह है और न ही समाज की। एक टीवी पत्रकार होने के नाते मैं ऐसे पाप का विरोध करता हूं और अपने आप से ये वादा करता हूं कि कम से कम अपने कार्यक्षेत्र में ऐसी हरकतों की गुंजाईश नहीं बनने दूंगा।

8 comments:

PD said...

चलिये आपने शुरूवात तो कर ही दी है.. अब ब्लौग से ही सही, मगर सही खबर पहूंचाईये.. :)

अनिल रघुराज said...

झूठ, अविश्वनीयता और धोखेबाजी के ऐसे ही 'लाइव प्रसारण' सरकार को वो बहाना देते हैं जिसके आधार पर वो मीडिया की आजादी पर हमला कर सकती है और तब जनता भी सरकार की हां में हां मिलाएगी। इसलिए अगर हमें मीडिया और प्रेस की आजादी को बचाना है तो इन धोखेबाज़ों को बेनकाब करना होगा। हिंदी जगत को आपसे ऐसे ही खुलासे की उम्मीद है।

Jitendra Dixit said...

जी हां अनिलजी...जब तक टीवी पत्रकारिता से गंदगी का ये दौर खत्म नहीं होता तब तक ब्लॉग ही अपने दर के पत्रकार को जिंदा रखने का क सहज माद्यम नजर आता है।

दिनेशराय द्विवेदी said...

आज कल न्यूज चैनल पर विश्वास कौन करता है? लोग मजे के लिए देखते हैं, वे मनी के लिए दिखाते हैं।

Sandeep Singh said...

जीतेंद्र जी बारिश होने वाले दिन तो मैने भी कई चैनल पर 2005 में पानी-पानी हुई मुंबई की तस्वीरें देखी थीं...हलांकि उस दिन भी चैनलों ने उन तस्वीरों को पुरानी बताने की जहमत नहीं उठाई थी...मैने भी उन्हें टीआरपी की होड़ में अच्छी पैकेजिंग का हिस्सा मान लिया था। लेकिन आपने तो आज जो बयां किया उस पर सहसा यकीन कर पाना मुश्किल हो रहा है...काश उस दुस्साहसी "जबरिया चैनल" का नाम पता चल पाता।

Udan Tashtari said...

ओह! कैसे बेवकूफ बनाया जा रहा है पुरानी तस्वीरें दिखा कर. आपके आने से कुछ तो सच्चाई पता लगती रहेगी.

mediamen said...

sir aap to ek mahan patrkar hai . hum aapki bahut ijjat bhi karte hai ..aap se ye umeed thi ki kam se kam uss news chnnel ka naam to apne lekh mein de hi dete.. lekin afsos ki baat hai ki aap bhi baaki logo ki tarah apni majburiyo ke saamane majboor dikh rahe hai.. shayad ye khatra hai ki agar usi chnnel mein kabhi kam karne ka mouka mila to kya hoga...?? Mumbai mein barish se trahi trahi karte logo ka hall sunane mein aap sabse aage dikhe.. honhar reporters ki fouj mein se ek kabil reporter worli sea face se mumbaikaro ki pareshaniyo ka bakhan karta live dekha gaya tha... shyad khabro mein bhale hi aage naa rakhe lekin TRP ki doud mein aage aane ki pur jor koshish aap bhi kar rahe.. thank you
your sincerly..

thanedar said...

पहले अपना फोटो तो सामान्य लोगों जैसा लगाओ दोस्त!