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Thursday, 3 May 2018

क्या मालूम भाय कब किसका निशाना चूक जावे?

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आज एक सज्जन से प्रेस कब के बाहर मुलाकात हुई जिन्होंने बताया कि उनका भतीजा सरवर शेख मेरे साथ स्टार न्यूज़ में बतौर कैमरामैन काम कर चुका है।
सरवर शेख इस नाम ने मुझे करीब 25 साल के एक ऐसे युवक की याद दिला दी जो था तो लंबा चौड़ा और हट्टा कट्टा लेकिन काफी दब्बू किस्म का। उसने थोड़े दिन ही बतौर कैमरामैन काम किया लेकिन उसके साथ के अनुभव यादगार रहे।
मुझे याद है वो 2004 में स्टार न्यूज़ में बतौर कैमरामैन लगा था। न्यूज़ चैनल में लगने से पहले वो एंटरटेनमेंट चैनल्स के लिए फ्रीलांस कैमरामैन का काम करता था। उसके साथ की गई पहली स्टोरी मैं कभी नही भूल सकता। जब हम गाड़ी में महालक्ष्मी के दफ्तर से निकले तो सरवर काफी खुशमिजाज मूड में था। सरवर को इस बात की खुशी थी कि उसे मेरे साथ स्टोरी पर जाने का मौका मिल रहा है। तब तक मेरे साथ सिर्फ चैनल के वरिष्ठ कैमरामैन ही भेजे जाते थे। रास्ते भर वो हंसते हंसाते, जोक सुनाते आया...लेकिन जब हमारी मंज़िल आयी तो उसके चेहरे से सारी हंसी गायब हो गयी।
हमारी मंजिल थी दक्षिण मुम्बई की पाकमोडिया स्ट्रीट और रिपोर्ट थी महजबीन नामक उस इमारत पर जो अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद ने अपनी पत्नी के नाम पर बनवाई थी। ये इमारत पाकमोडिया स्ट्रीट में ठीक दाऊद के पुराने घर के सामने थी जिसे बीएमसी के तत्कालीन अधिकारी खैरनार ने 90 के दशक में ढहा दिया था। अपनी रिपोर्ट के लिए मुझे उस इमारत के मलबे के बैकड्रॉप में कैमरे के सामने खड़े होकर पीटीसी करना था।
फ्रेम बनाकर मैने पीटीसी करना शुरू किया। पीटीसी में मैंने दाऊद के लिए "देशद्रोही", "गद्दार", "बेगुनाहों का हत्यारा", "भगोड़ा" जैसे शब्दों इस्तेमाल किया था। ये सब सुनकर सरवर विचलित हो गया। दाऊद के बारे में इस तरह के शब्द सरेआम इस्तेमाल करते हुए उसने पहली बार किसी को देखा था। वो तुरंत ही वहां से निकल जाना चाहता था। जैसे ही पीटीसी खत्म हुआ वो घबराकर गाड़ी की और दौड़ा।
लौटते वक्त गाड़ी में वो बड़ी देर तक खामोश रहा। मैंने पूछा-क्या हुआ सरवर इतने चुप क्यों हो? कोई टेंशन है क्या?
लड़खड़ाई आवाज में उसने जवाब दिया - "सोच रहा हूँ अब आपका क्या होगा?"
"मेरा क्या होगा? क्या मतलब?"
"भाय आपने दाऊदभाय को इतना उल्टा सुल्टा बोले वो भी उनके घर के बाहर इच खड़े रे के। दाऊदभाय सुनेंगे तो भड़क जाएंगे। आपको छोड़ेंगे क्या? भोत डेंजर आदमी है भाय।"
मुझे हंसी आ गई
मैन कहा -"सरवर तुम मेरी चिंता मत करो। अभी एंटरटेनमेंट से नए नए न्यूज़ में आये हो न। धीरे धीरे इसकी आदत हो जाएगी।"
मेरे जवाब से वो संतुष्ट नही लगा।उसे पसीना आ रहा था।
उसके बाद मैंने देखा कि सरवर मेरे साथ शूट पर आने में कतराने लगा। जब भी ऑपरेशन्स मैनेजर उसे मेरे साथ शूट पर जाने को कहता तो वो कोई न कोई बहाना बनाकर टालने की कोशिश करता। कभी तबियत खराब होने का तो कभी किसी नाते रिश्तेदार के अचानक एक्सीडेंट में घायल हो जाने का वगैरह।
महालक्ष्मी की जिस गली में स्टार न्यूज़ का दफ्तर था उसी के मुहाने पर चाय की स्टाल लगती थी। स्टार न्यूज़ के कर्मचारी वहीं चाय के लिए आते थे। मेरे भी ब्यूरो के बाकी रिपोर्टर्स के साथ वहां दिन में तीन चार चक्कर लगते।
मैंने दो तीन बार गौर किया कि जब भी मैं चाय के स्टाल पर पहुंचता और वहां अगर सरवर पहले से मौजूद है तो मुझे देख कर वो दूर खड़ा जो जाता। मुझे समझ नही आता कि वो ऐसा क्यों कर रहा था।
एक दिन इसी तरह मैं अपने साथी रिपोर्टर्स के साथ वहां चाय पीने के लिए पहुंचा। सरवर वहां पहले से चाय का कप लेकर खड़ा था। मुझे देखते ही वो फिर करीब 10 मीटर दूर जाकर खड़ा हो गया। मैंने चाय का कप लिया और उसके पास पहुंचा। सरवर के कंधे पर हाथ रखकर पूछा- क्या हुआ सरवर? मुझे देखकर भाग क्यों जाते हो?
सरवर के शरीर मे हल्की से कंपकपी होने लगी और पसीना छूटने लगा। इस हालत में उसने जो जवाब दिया वो याद करके आज भी मैं अपनी हंसी नही रोक पाता।
सरवर ने हिचकिचाते हुए कहा- "आपसे तो दूर रहना ही ठीक है भाय। क्या मालूम कब किसका निशाना चूक जावे..."
माजरा समझ मे आ चुका था। सरवर को डर था कि डी कंपनी का कोई शूटर मुझे गोली मार सकता है और अगर वो मेरे नजदीक रहा तो गलती से गोली उसे भी लग सकती है।
खैर सरवर की मौत चूकी हुई गोली से नही हुई। स्टार न्यूज़ छोड़ने के बाद उसने कलर्स चैनल के रियलिटी शो "बिग बॉस" में बतौर कैमरामैन काम करना शुरू किया था और लोनावाला में शूट के लिए यूनिट के बाकी सदस्यों के साथ रहता था। एक रात खाना खाकर जब वो वापस होटल लौट रहा था तो उसकी कार खंडाला की खाई में जा गिरी जिसमे उसकी मौत हो गयी।
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