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Monday, 11 November 2013

डाईबिटीज: 200 साल जीने का वरदान !!!

बधाई हो। अब तुम 200 साल जी सकते हो। ये प्रतिक्रिया थी मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और मेरे मित्र डी.शिवानंदन की जब उन्हें ये पता चला कि मैं भी डाईबिटिक हूं। उनके लफ्ज सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ और लगा कि शायद वो कोई व्यंग कर रहे हैं। जो डाईबिटीज आज दुनिया के तमाम शहरी इलाकों में हौवा बन चुकी है और जिसे लोग साईलेंट किलर मानते हैं उसके होने से किसी की उम्र कैसे बढ सकती है? शिवानंदन ने बात को स्पष्ट किया। उनका कहना था कि डाईबिटिज होने के बाद इंसान को अपनी जिंदगी में जिस अनुशासन की जरूरत पडती है अगर उस पर सख्ती से अमल किया जाये तो इंसान की उम्र और बढ सकती है। डाईबिटीज से होने वाले नुकसान को तो रोका ही जा सकता है उम्र के साथ आनेवाली दूसरी बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

करीब सालभर पहले ही डाईबिटिज ने मुझे अपनी गिरफ्त में लिया है। चूंकि मेरे माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, वगैरह तमाम रक्त संबंधभी डाईबिटिक हैं तो मैं भी मानसिक तौर पर तैयार था कि एक न एक दिन मुझे भी डाईबिटीज होना ही है...लेकिन डाईबिटज इतनी जल्दी हो जायेगी इसका अंदाजा न था...लगा था और 8-10 साल बाद होगी। मेरी तरह ही उसी दौरान दफ्तर के 4-5 और भी हमउम्र सहकर्मियों को डाईबिटीज होने की खबर मिली...कुछ मुंबई के थे, कुछ नोएडा के। भारत में डाईबिटीज के बढते आंकडे जो आये दिन हम अखबरों में पढ रहे थे, वे सभी अब आसपास ही नजर आने लगे। डाईबिटीज कितनी व्यापक हो चुकी है इसका अंदाजा तब आया जब लोगों से इस मुद्दे पर बात करने पर पता चला कि लगभग हर दूसरा व्यकित डाईबिटीज का डॉक्टर है और उसके पास शुगर को कंट्रोल में रखने या डाईबिटीज पूरी तरह से खत्म कर देने का नुस्खा है। कोई खुद डाईबिटीज से ग्रस्त निकलता या किसी के घर में किसी न किसी को डाईबिटीज होती। कोई कहता कि कच्ची भिंडी को रातभर पानी में भिगो कर सुबह पानी पी लीजिये, कुछ दिनों में डाईबिटीज गायब। किसी की सलाह थी कि करी पत्ते को उबाल कर उसका पानी पीजिये, डाईबिटीज खत्म हो जायेगी। करेला, जामुन और नीम के रस पीने की भी सलाह दी गई। हो सकता है कि इन तमाम उपायों से शुगर काबू में रहे, लेकिन इनसे डाईबिटीज खत्म हो जायेगी, ये मानना बेवकूफी है। आज तक ऐसी कोई मिसाल सामने नहीं आई है। डाईबिटीज शरीर में होने वाला वो बिगाड है, जिसकी मरम्मत नहीं हो सकती।

डाईबिटीज से ग्रस्त होने का मतलब है कि अपनी जीवन शैली, रहन-सहन और आदतों में भारी परिवर्तन करना। अगर शिवानंदन के मामले को केस स्टडी के तौर पर देखें तो उन्होने डाईबिटिक होने के बाद अपनी जिंदगी में कई बडे फेरबदल किये और अपने आप को अनुशासित किया। 63 साल के शिवानंदन डाईबिटीज की गिरफ्त में साल 1998 में आये जब वो मुंबई क्राईम ब्रांच के मुखिया थे। ये वो दौर था जब अंडरवर्लड मुंबई शहर पर हावी था। कोई ऐसा दिन न बीतता था जब गैंगस्टर किसी की हत्या न करते हों। ऐसे हालात में शिवानंदन पर काम का दबाव और तनाव बढ गया। रात रात भर जाग कर गैंगस्टरों को खत्म करने की रणनीति बनाना, वारदात के ठिकानों का मुआयना करना, अदालती मामलों का अध्ययन करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गई थी। न नींद मिल पाती थी और न वक्त पर खाना मिल पाता था और नतीजतन हो गई डाईबिटीज। डाईबिटीज ग्रस्त होने के बाद शिवानंदन ने अपनी जो दिनचर्या अपनाई उसके मुताबिक वे दिन में 5 बार खाना खाते हैं, लेकिन पांचों बार खाने की मात्रा काफी कम रहती है।हर बार खाने के बीच 3 घंटे का अंतर रहता है। रात का खाना वे सोने से 2 घंटे पहले 8 बजे ही कर लेते हैं। आमतौर पर वे शाकाहारी खाना खाते हैं। हफ्ते में 5 दिन वे 1 घंटे के लिये व्यायामशाला जाते हैं और 2 दिन घंटेभर तक पैदल चलते हैं। डाईबिटीज होने के बाद से उन्होने अपना वजन बरकरार रखा है। 15 साल पहले भी उनका वजन 82 किलो था और आज भी 82 किलो ही है। शिवानंदन के मुताबिक न तो वे शराब के शौकीन हैं और न ही उन्हें सिगरेट की आदत है। उन्होने कॉल्ड ड्रिंक्स से भी परहेज रखा है। वे शुगर कंट्रोल करने वाली गोलियां नियमित रूप से लेते हैं, जिसके अलावा डाईबिटीज को लेकर वे दूसरा कोई नुस्खा नहीं अपना रहे। शिवानंदन का कहना है कि वे अब हमेशा अपने आप को खुश रखने की कोशिश करते हैं और जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया रखते हैं।इस बात को शिवानंदन बडे गर्व से बताते हैं कि डाईबिटीज होने के बाद उन्होने जो जीवनशैली अपनाई है उससे वे कभी बीमार नहीं पडे, कभी अस्पताल में भर्ती नहीं होना पडा और अब भी पूरी तरह से तंदुरूस्त हैं।


शिवानंदन की अपनाई हुई जीवन शैली तो उनके लिये काम करती दिख रही है, लेकिन कितने युवा डाईबिटिक उनके जैसी लाईफस्टाइल अपनाने को तैयार होंगे? कईयों के लिये उनकी तरह जीना तो शायद जीने की परिभाषा में भी फिट न बैठता हो। नहीं चाहिये ऐसा 200 साल जीने का वरदान..लीवर सडे तो सडे, किडनी बेकार हो रही हो तो हो जाये, आंखों से रोशनी कम हो रही हो तो हो जाये, ब्लड प्रेशर बढता हो तो बढे, दिल में दर्द होता हो तो हो। हैप्पी वर्लड डाईबिटीज डे !!!. 

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