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Thursday, 13 August 2015

5 चीजें जो हमने राधे मां से सीखीं !


सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां के मामले को देखकर हमें कई नई बातें पता चलतीं हैं तो वहीं कई पुराने अनुभवों को फिर एक बार बल मिलता है।

पढे लिखे और पैसे वाले लोग भी आ सकते हैं झांसे में।
आमतौर पर पाखंडियों के चक्कर में गरीब, अनपढ और भोलेभाले लोग जल्दी फंस जाते हैं, लेकिन सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां के भक्तों में कई जानीमानी फिल्मी और टेलीविजन की हस्तियां, राजनेता, कारोबारी और पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। ऐसे लोगों से सुखविंदर को करोडों का चढावा मिलता है। वैसे ये कोई नई बात नहीं इस तरह के स्वघोषित देवी देवताओं और धर्मगुरूओं के दरबार में पहले भी समाज के नामचीन लोग और उच्च तबके के सदस्य हाजिरी लगाते आये हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी का आसाराम के दरबार में जाना याद होगा आपको। इसी तरह दक्षिण के सत्य साईंबाबा के दरबार में भी देश के कई बडे राजनेता मत्था टेकने जाते थे। सुखविंदर ने उसी चलन की फिर एक बार याद दिला दी।

प्रचार माध्यम के जरिये किसी को भी भगवान बनाया जा सकता।
सुखविंदर कौर जब राधे मां के भेष मे अपने भक्तों के दर्शन देने के लिये प्रकट होती हैं तो ऐसा माहौल बनाया जाता है जैसे कि देवी मां खुद भक्तों से मिलने के लिये अपने धाम से उतरीं हैं। इसके लिये सुखविंदर को अपने घर रखने वाला गुप्ता परिवार प्रचार-प्रसार के सारे माध्यम इस्तेमाल करता है। सडकों के किनारे बडे बडे बैनर, यू ट्यूब पर राधे मां की चौकी के वीडियो, राधे मां के बारे में जानकारी देनेवाली वेबसाईट वगैरह का पूरा इस्तेमाल किया जाता है सुखविंदर को एक देवी के रूप में पेश करने के लिये। राधे मां के मामले का अध्ययन करने से पता चलता है कि किस तरह से पंजाब में दर्जी का काम करने वाली एक साधारण महिला को देवी बनाया जा सकता है और उसके जरिये कैसे करोडों हासिल किये जा सकते हैं।

संन्यासी की परिभाषा बदल गई है।
अब तक संन्यासी का मतलब होता था कि कोई ऐसा शख्स जो कि सांसारिक आकर्षणों का त्याग कर दे और अपने जीवन को ईश्वर की भकित में लगा दे। ईश्वर की भकित के अलावा उसकी किसी चीज में दिलचस्पी नहीं होती, लेकिन सुखविंदर का मामला ऐसा नहीं है। एक गृहस्थ इंसान अपने जीवन में जिन चीजों का आकर्षण रखता है, वो हर चीज सुखविंदर के पास है और भरपूर है। वो शादीसुदा है, उसके 2 बच्चे हैं, वो महंगी गाडियों में घूमती है, आलीशान बंगले में रहती है, करोडों के जेवरात पहनती है, विदेश घूमने जाती है, स्टाईलिश डिजाइनर कपडे पहनती है, फिल्मी गानों पर झूमती है...और क्या चाहिये? फिर भी सुखविंदर अपने अंधे भक्तों की नजर में एक संन्यासिन है।


पुलिस से मिलता है स्पेशल ट्रीटमेंट
एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान आपके पास से नेलकटर या शेविंग रेजर भी निकल आया तो वो जब्त कर लिया जाता है, लेकिन राधे मां बनीं सुखविंदर हाथ में त्रिशूल लेकर विमान में सफर कर सकती है और कोई उसे कुछ नहीं कहता। देशभर में सालाना सैकडों लोग दहेज प्रताडना के सच्चे-झूठे आरोपों के चलते शिकायत दर्ज होते ही आईपीसी की धारा 498 A के तहत गिरफ्तार कर लिये जाते हैं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस आगे की जांच करती है और सबूत जुटाती है, लेकिन सुखविंदर के मामले में पुलिस ने शिकायत दर्ज होने के बाद तय किया कि पहले जांच करके देखा जायेगा कि उसके खिलाफ कोई सबूत है या नहीं। गिरफ्तारी करनी है या नहीं, ये बाद में तय होगा। इसके अलावा गुप्ता परिवार के नाम रजिस्टर्ड जिस आलीशान कार में सुखविंदर घूमती है, उसका रजिस्ट्रेशन टैक्स चोरी के इरादे से फर्जी पते पर हुआ है, फिर भी पुलिस आंखें मूंदे रहती है।

बहती गंगा में सब हाथ धोते हैं

जो लोग कभी खुद को सुखविंदर उर्फ राधे मां का कट्टर भक्त बताते थे, वे लोग भी अब उसकी नैया डूबते देख खुलकर उसकी निंदा कर रहे हैं। मीडिया में उसके खिलाफ बयानबाजी करके मुफ्त की पब्लिसिटी हासिल कर रहे हैं।

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