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Tuesday, 7 August 2007

नहीं चाहिये दाऊद का भाई - जीतेंद्र दीक्षित

दाऊद के भाई इकबाल कासकर ने बरी होते वक्त कहा था कि जेल से रिहा होने के बाद वो बाहर आकर समाज सेवा करना चाहता है और उसके बाद सियासत में भी अपने पैर जमाने की कोशिश करेगा। उसने 2 साल पहले भी जेल से विधानसभा चुनाव लडने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस के दबाव में आकर उसने अपना पर्चा वापस ले लिया। अब इकबाल कैद से आजाद है और न ही उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला चल रहा है, लेकिन फिर भी महाराष्ट्र की कोई राजनैतिक पार्टी उसे लेने को तैयार नहीं।

शिवसेना और बीजेपी जैसी हिंदुत्ववादी पार्टियां तो उसे लेने से रहीं, लेकिन हमने कांग्रेस, एनसीपी और समाजवादी पार्टी जैसे खुद को सेकुलर बताने वाले राजनैतिक दलों के आला नेताओं से जब ये पूछा कि क्या वो इकबाल कासकर को अपनी पार्टी की सदस्यता देंगे तो उनके बडे दिलचस्प जवाब मिले-

कांग्रेस (हुसैन दलवई, प्रवक्ता)
"कांग्रेस पार्टी ऐसे ही कोई ज्वाईन नहीं कर सकता। ज्वाइन करनेवाले का इतिहास देखा जाता है। उसका चरित्र देखा जाता है। इकबाल ने कहा है कि वो सामाजिक काम करना चाहता है तो करने दो उसे...अच्छी बात है। कांग्रेस पार्टी मे ऐसे गैर तत्वों को नहीं लिया जाता।"

समाजवादी पार्टी ( अबू हासिम आजमी)
"जब अरूण गवली नेता बन सकते हैं तो इकबाल कासकर भी पॉलिटिक्स में आ सकते हैं। कोई पार्टी ज्वाईन कर सकते हैं खुद की पार्टी बना सकते हैं, लेकिन हमारी अभी कोई बातचीत उनसे नहीं हुई है तो ये सवाल हमसे क्यों पूछा जा रहा है।"

एनसीपी ( अरूण गुजराती, महाराष्ट्र प्रमुख)
"मैं उस स्थिति के बारे में कुछ नहीं कह सकता। आज वो सबजेक्ट नहीं है, वो इश्यू नहीं है इसलिये मैं इस सवाल का जवाब नहीं देना चाहता।"

अब जब कि कोई राजनैतिक पार्टी इकबाल को लेने को तैयार नहीं है तो उसके सामने यही विकल्प बचता है कि वो खुद की पार्टी गठित करे।

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